Meri Kahani

अच्छी संगत से मिली रब की रहमत…

मेरी कहानी भाईजान की ज़ुबानी में आज की कहानी हमें ग्रंथि अमृतपाल सिंह ने भेजी है. जो उनकी आपबीती घटना पर आधारित है. तो चलिए बताते हैं उनकी ये कहानी.

अमृतपाल सिंह जब 15 साल के थे तब उनकी ज़िंदगी बेहद अलग थी. उनके अक्सर दोस्त बुरी आदतों में मुब्तला थे. अमृतपाल भी अधिक्तर इन दोस्तों के साथ ही अपना जीवन गुज़ारा करते थे. इसके साथ ही वो उन दिनों में सरकारी नौकरी में जाने का भी ख़वाब देखा करते थे. जिसके लिए वो हर संभव मेहनत के साथ हर दर जा जा कर मन्नते मुरादें भी मांगा करते थे. लेकिन कहीं से भी आशा की किरण नहीं दिख रही थी.

इस बीच वो कभी कभी गुरूद्वारे में कथा सुनने को चले जाते थे. वहीं उनके गांव से कुछ दूरी पर स्थित गुरूद्वारे में उनकी मुलाकात ग्रंथि इंदरजीत सिंह से हुई. जिनकी वाणी का अमृतपाल पर काफी प्रभाव पड़ा और वो धीरे धीरे गुरु भक्ति में लीन होने लगे. जैसी ही उन्होंने गुरु भक्ति में अपना मन लगाना शुरू किया वैसे ही उनके बुरे दोस्त उनसे दूरी इख्तियार करने लग पड़े.

इसी दौरान ग्रंथि इंदरजीत सिंह ने उन्हें अमृतधारी होने का आह्वान किया साथ ही ग्रंथि का डिप्लोमा करने को भी कहा. उनकी इस बात को अमृतपाल ने भी कबूल कर लिया और किसी तरह पैसे का इंतज़ाम करते हुए ग्रंथि के कोर्स में एडमिशन ले ली. कब उनकी दोस्ती बुरे लोगों से धार्मिक लोगों में तब्दील हो गयी इसका अमृतपाल सिंह को भी मालूम नहीं लगा.

इसे वो रब की नेमत के रूप में मानते हैं और रब जिसे चाहता है अपनी नेमत से नवाज़ देता है. लेकिन इसके लिए हमें खुद पहल करने की ज़रूरत है. रब राहें अपने आप दिखता है. जब से वो रब भक्ति में लगे हैं तबसे ज़िंदगी जीने के नए मायने उन्हें पता चले. अब अपने साथ लोगों को भी रब भक्ति के लिए प्रेरित करते हैं. ऐसा करने से उन्हें बेहद शांति का एहसास होता है.

तो ये थी हमारी आज की मेरी कहानी भाईजान की ज़ुबानी. अगर आपको ये कहानी अच्छी लगी हो तो Like का Button Press करें और आगे share ज़रूर करें.

अगर आप भी हमें कोई अपनी आप बीती कहानी भेजना चाहते हैं तो mirza.anish21@gmail.com पर मेल कर सकते हैं. या इस नंबर 9805554298 पर call या whats app करके भी आप अपनी कहानी भेज सकते हैं. सदा मौज में रहें आपका #MirzaBhaijaan

Like

Like Love Haha Wow Sad Angry

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *