BJ ki Shayri

तभी बढ़ेगी हर इंसान की शान…जब थामे ये ज़बान…

खुद तो रहती है गुमसुम छुपके…

पर अलफ़ाज़ तेरे रहते थिरके…

तेरी ख़ामोशी में दीन ओ  ईमान…

मगर तेरे तैश में बसा है शैतान..

जब चले तेज़ धारी सी तो करदे हैरान…

 लेकिन जब बरसाए फूल तो सब मेहरबान…

इंसान के किरदार की तब होती है असल पहचान…

जब वो है गुलाम इसका या है गुलाम इसकी ज़बान…

तभी बढ़ेगी हर इंसान की शान…

जब थामे इस ज़बान की तान…

तभी बढ़ेगी हर इंसान की शान…

जब थामे इस ज़बान की तान..

तभी बढ़ेगी हर इंसान की शान…

जब थामे इस ज़बान की तान..

अनीश मिर्ज़ा

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