BJ ki Shayri

फ़िक्र नहीं है…अब किसी को किसी की…

समझ कर भी समझ ना आए…

क्या हुआ है किसको बताएं…

माजरा भी है उल्टा सारा…

क्यूं बन गया है दिल बेचारा…

फ़िक्र नहीं है अब किसी को किसी की…

बस अपने काम में दिलचस्पी सबकी…

ये कैसा युग आ गया…

भाई भाई का ना रहा…

प्यार-मोहब्बत जाता रहा…

बस दौलत से रिश्ता बनता रहा…

ऐ रब तेरी कायनात में बशर का हश्र क्या हो गया…

तेरा बंदा अपनी दुनिया में खो गया…

ये क्या हो गया…

तेरा बंदा अपनी दुनिया में खो गया…

तेरा बंदा अपनी दुनिया में खो गया…

तेरा बंदा अपनी दुनिया में खो गया…

अनीश मिर्ज़ा

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