Meri Kahani

ट्रैकिंग करते जब निकले गलत रास्ते पर फिर हुई ये घटना..

मेरी कहानी भाईजान की ज़ुबानी में आज की कहानी काफी रोमांचित करने वाली है. ये कहानी हमें नदीम मिर्ज़ा ने भेजी है. जो उनकी सच्ची साहसिक घटना पर आधारित है. तो चलिए बताते हैं उनकी ये कहानी..

नदीम मिर्ज़ा पेशेवर फोटोग्राफर हैं उन्हें फोटोग्राफी का काफी शौक है. इसी शौक के चलते नदीम ने कई तरह की फोटोग्राफी को अंजाम दिया है. ये बात 2005 अगस्त के महीने की है जब नदीम ने अपने दोस्तों संग खुंडीमराल पर्वत पर जाने का प्लान बनाया और इस ट्रैकिंग को वो डाक्यूमेंट्री की शक्ल में कैद भी करना चाहते थे. इसके लिए वो अपने full कैमरा उपकरण  साथ ले कर जा रहे थे. ये तक़रीबन दो तीन दिनों का पैदल ट्रैक था. कुछ स्थानीय लोगों के द्वारा इस जगह के ट्रैक को काला पाना भी कहा जाता है. क्यूंकि यहां दूर दूर तक ना कोई बंदा ना बंदे की ज़ात दिखाई देती है. ये बहुत ही रहस्यमय ट्रैक है.

khundimaraal

नदीम अपने दोस्तों के साथ खुंडीमराल पर्वत का ट्रैक पैदल चलना शुरू करता है. एक दो घंटे तक वो लगातार चलते रहते हैं. साथ में नदीम डाक्यूमेंट्री के लिए जब फिल्माने लगा तो ठण्ड होने की वजह से  कैमरे ने साथ देना बंद कर दिया. तो इस तरह डाक्यूमेंट्री बनाने के प्लान पर पानी फिर गया. वो सब लोग थक के चूर हो गए थे और भूख का भी आलम बढ़ गया था. तभी नदीम ने अपने बैग से मैगी के पैकेट निकाले और आग जला कर मैगी बनाने का इंतज़ाम करने लगा. जैसे ही वो लोग मैगी खा रहे थे तो नदीम की नज़र दूर से आ रहे बकरिया चराने वाले पर पड़ी जो वेशभूषा से लाहौल स्पीती का लग रहा था. नदीम एका एक उस बकरिया चराने वाले के पास गया. अरे भाई तुम यहाँ खुंडी मराल के ट्रैक पर क्या कर रहे हो वो कहने लगा बाबू जी कैसा खुंडी मराल का ट्रैक ये तो लाहौल स्पीती का ट्रैक है.. जब नदीम ने ये सुना तो मानो उसके पॉव से ज़मीन ख़िसक गयी हो .. दरअसल वो लोग रास्ता भटक गए थे और तकरीबन 10 km तक गलत रास्ते पर निकल गए थे. रात का अँधेरा मुसलसल बढ़ता जा रहा था और उपर से बादलों की गर्जन के साथ तेज़ बारिश शुरू हो गई.

Yashpalranaphotography

नदीम के कुछ दोस्त ये सब देख कर वहां अपशब्द भी कहने लगे और उस जगह को कोसने लगे. तभी नदीम ने हिम्मत जुटाते हुए अपने बैग में पड़े गरम कपड़े निकाले और उस तेज़ बारिश में अपने कपड़ो की मशाल बनायीं और बहुत मुश्किलों के साथ उस बारिश में चलते चले. जैसे ही तेज़ बारिश में मशाल की आग बुझने लगती अगले ही पल नदीम अपने और कपड़े निकलता और उसकी मशाल बना देता. ऐसा करते करते वो वहां से निकलते हैं. जैसे ही वो नीचे पहाड़ी पर पहुंचते है बारिश तो थम जाती है लेकिन इतनी धुंध और अँधेरा होता है की रास्ते का कोई नामोनिशान नहीं दिख रहा होता है.

नदीम नम आंखों से रब के हुजुर दुआ के लिए हाथ उठाता है और कुछ ही पल के बाद रास्ता साफ़ दिखाए देने लगता है.. वो लोग जैसे ही उस दायरे से बाहर आते हैं तो अचानक से उनके कैमरे भी अपने आप ठीक हो जाते हैं और मौसम भी खुशगवार हो जाता है. तभी नदीम अपने दोस्तों को कहता है दोस्तों तुम्हारी बेअदबी की वजह से शायद प्रकृति हम से नाराज़ हो गयी थी. वो सभी लोग सच्ची माफ़ी मांगते हैं और सकुशल घर पहुँचते हैं. अगर आपको ये कहानी पसंद आई तो पोस्ट के नीचे like का button press करें और अपने सुझाव कमेंट पर लिखें. साथ ही आप भी अपनी कोई ऐसी सच्ची घटना हमें भेजना चाहते हैं तो mirza.anish21@gmail.com पर भेज सकते हैं.. आपका #bhaijaan

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