Zindagi Life

लोगों को समझने में यकीन रखती हैं डॉ. अनुपमा शर्मा पाठक…

Zindagi life:

Zindagi life: ज़िंदगी एक सफ़र है इस सफ़र में कई तरह की मंज़िले तय करनी पड़ती हैं. कभी राहें मुश्किल तो कभी गुमनाम राहें मिलती हैं. लेकिन जो लोग मुसलसल चलते रहने में यकीन रखते हैं. वो कामयाबी के शिखर पर ज़रूर पहुंचते हैं. Zindagi Life के इस सेगमेंट में अनुपमा शर्मा पाठक की कहानी भी कुछ ऐसे ही तजुर्बे बयान करती है.

अनुपमा शर्मा पाठक हिमाचल प्रदेश के शिमला के छोटे से गांव सुन्नी से तालुक रखती हैं. बच्चपन से ही उन्हें पढ़ाई में काफी दिलचस्पी थी. अनुपमा बताती हैं कि उनके पिता बैंक में मुलाज़िम थे जिसकी वजह से हर तीन साल में उनके तबादले होते रहते थे. इससे उन्हें बच्चपन से ही नई जगह देखने को मिली. इतना ही नहीं नए दोस्तों के साथ नए रस्म-ओ-रिवाज़ को जानने का मौका भी मिला.

Collegeके दिनों में अनुपमा शर्मा पाठक की ग्रुप में तस्वीर.

अपनी स्कूल की ज़िंदगी के बारे में बताते हुए अनुपमा कहती हैं कि धर्मशाला के Sacred Heart स्कूल से आग़ाज़ होते हुए Tara Hall शिमला फ़िर Carmel Convent School चंडीगढ़ उसके बाद Presentation Convent जम्मू से पढ़ाई हासिल की. इसके साथ ही आखिर में Carmel Convent School चंडीगढ़ से matric की पढ़ाई मुकम्मल की.

यूनिवर्सिटी के दिनों में अनुपमा शर्मा पाठक अपने दोस्त और टीचर्स के साथ…

अगर उनके कॉलेज के दिनों की बात करें तो उन्होंने St. Bedes शिमला से ग्रेजुएशन करने के बाद हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से MA English की पढ़ाई को किया. इसके बाद उन्होंने BJMC Course में एडमिशन लिया. इसके अलावा M.Phil करने के बाद अपनी पसंद की शादी कर ली और 1998 में चंबा डिग्री कॉलेज में अपनी पहली नियुक्ति दी. इसके बाद 2011 में उन्हें English Literature Doctorate की उपाधि मिली. साथ ही उनके कई research paper मौजूद होने के साथ दो किताबें Journalism विष्य में आ चुकी हैं.

अगर उनकी hobbies की बात करें तो उन्हें Travelling, Reading के शौक साथ साथ वो एक Animal Lover भी है. जानवरों को तकलीफ़ में देख कर उन्हें बहुत दर्द होता है.

फिर एक ऐसा वक़्त भी आया जब उन्हें 2008 में Facial Paralysis का attack हो गया. लेकिन उन्होंने इस मर्ज़ का हिम्मत से सामना करते हुए बहुत जल्द इससे बाहर निकल आई और अपने हिम्मत हौंसले की बेहतरीन मिसाल पेश की.

अनुपमा अपने पिता को अपना आदर्श मानती हैं वो कहती हैं कि उनके पिता ने 70 साल की उम्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है. यूँ तो वो SBI से रिटायर्ड हैं लेकिन अभी भी कॉलेज में वो पढ़ाते हैं. इसके साथ ही वो कहती हैं मैंने अपने Teachers से ज़िंदगी के कई अनुभव सीखे हैं. उनके Favourite Teachers में Dr. जयदेव, Prof. Vepa Rao और डॉ. पंकज का नाम शामिल है.

आजकल डॉ. अनुपमा शर्मा पाठक Govt. Kotshera College शिमला में अपनी सेवाएं दे रही है.आखिर में वो कहती हैं कि मैं लोगों को समझने में यकीन रखती हूं. हम हमारे आस पास के लोगों से बेहद कुछ सीख सकते हैं. साथ ही इंसान को हमेशा सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए. मुझे लोगों और अपने Students से बेहद लगाव है.

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