Zindagi Life

हरदिल अज़ीज़ शख्सियत के मालिक हैं आज़ाद हुसैन…

Zindagi Life:

Zindagi Life: ये ज़िन्दगी रब का एक नायाब तोफ़ा है.कोई इस तोफे की कदर करता है तो कोई बुरी आदतों में पड़ कर इसको गवा देता है. लेकिन कुछ लोग जैसा भी वक़्त आ जाये इस ख़ूबसूरत ज़िंदगी में हर पल रब की नेमतों का शुक्र अदा करके अलग अंदाज़ में इस ज़िंदगी को जीते हैं. Zindagi Life के इस segment में आज़ाद हुसैन की कहानी भी कुछ ऐसे ही तजुर्बों को बयान करती है.

जिला चंबा से तालुक रखने वाले आज़ाद हुसैन सादगी से जीवन जीने में यकीन रखते हैं. आज़ाद हुसैन हरदिल अज़ीज़ शख्सियत के मालिक हैं.अपने बच्चपन के दिनों में वो पढ़ाई में काफ़ी काबिल थे. जिसकी बदौलत उन्हें पढ़ाई में काफ़ी वज़ीफे भी हासिल हैं. उन्हें खासतौर पर पढ़ाई में वक्फ़ बोर्ड द्वारा भी कई वज़ीफे मिले हैं. इसके साथ ही आज़ाद हुसैन बताते हैं कि केके बिज प्रिंसिपल ने उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए काफ़ी सहयोग किया.इसके अलावा पढ़ाई के साथ साथ वो cultural Activity में भी काफी माफिर थे. उनकी बेहतरीन आवाज़ में गुनगुनाई नज़म आज भी लोगों के दिल को सुकून दे जाती है.

आज़ाद हुसैन के स्कूल दिनों की तस्वीर

कॉलेज के दिनों का एक वाक्या सांझा करते हुए आज़ाद हुसैन कहते हैं कि 1978 में कॉलेज के दिनों में स्टेट cultural एक्टिविटी में हिस्सा लेने के दौरान उस वक़्त के उपमुख्यमंत्री जम्मू एंड कश्मीर D.B. Thakur ने उनके ग्रुप प्रफोमेंस से प्रभावित हो कर 15 लड़के-लड़कियों को J&K में cultural कार्यक्रम करने का न्यौता दिया जो बहुत गर्व की बात थी.

क्रिकेट टीम के साथ आज़ाद हुसैन की तस्वीर

इसके बाद 1981 में उन्होंने चंबा डिग्री कॉलेज से अपनी स्नातक की पढ़ाई भी पूरी कर ली और कड़ी मेहनत के बाद 1983 में हाईकोर्ट शिमला में क्लर्क की नियुक्ति मिल गई. उन्होंने तक़रीबन आठ साल तक शिमला में अपनी सेवाएं दी फिर चंबा कोर्ट में कार्यरत हो गए.

अगर उनकी hobbies की बात करें तो उन्हें गायकी के शौक के साथ-साथ क्रिकेट और हॉकी खेलने में भी काफ़ी दिलचस्पी थी. उन्होंने All India Radio के लिए भी प्रोग्राम रिकॉर्ड किये हैं. जो लोगों द्वारा काफ़ी पसंद किये गए थे. उनकी मधुर आवाज़ का जादू लोगों के दिलों पे राज़ करता था.

आज़ाद हुसैन अब Superintendent ग्रेड/2 की पोस्ट से रिटायर हो गए हैं. लेकिन ज़िंदगी में उन्हें जो भी मुकाम हासिल हुए उसे वो रब की रहमत के साथ-साथ माँ-बाप की दुआओं का असर समझते हैं. साथ ही ज़िंदगी के हर मोड़ पर उनकी पत्नी के सहयोग से उन्हें बेहद मज़बूती मिली. आखिर में वो युवाओं को संदेश देते हुए कहते हैं कि बड़े बुजुर्गों की दुआएं ज़रूर लेनी चाहिए देर सवेर ही सही उनकी दुआओं का असर ज़रूर मिलता है.

तो ये थी हमारी आज की Zindagi Life सेगमेंट की कहानी. अगर आपको ये article अच्छा लगा हो तो like का बटन press करें और Comment करके अपने सुझाव ज़रूर दें.

सदा मौज में रहें आपका #MirzaBhaijaan

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