Meri Kahani

मैथ सब्जेक्ट नहीं परेशानी का सबब बन रहा था…

मेरी कहानी भाईजान की ज़ुबानी में ये सच्ची कहानी सबकी हौसला अफज़ाई कर देगी. हमें ये कहानी रमिंदर सिंह ने भेजी है. इसमें उन्होंने अपनी ज़िंदगी से जुड़ा एक अनकहा पल सांझा किया है. जो कई मायूस चेहरों पे ख़ुशी की छाप बिखेर जाएगा.चलिए बताते हैं उनकी सच्ची कहानी.

ये बात उन दिनों की है जब रमिंदर सिंह अकेला मायूस रहा करता था.ना वो किसी से ज्यादा बातें किया करता था ना वो महफ़िलों में जाया करता था.इसके पीछे एक बड़ा कारण रमिंदर की Bsc 1st year में math सब्जेक्ट में compartment आना था. लिहाज़ा रमिंदर अगली क्लास में तो पहुंच रहा था साथ ही Bsc 1st year की compartment का बोझ भी साथ ढो रहा था. एक तरफ Bsc 2nd year की पढाई और दूसरी तरफ Bsc 1st year की compartment को क्लियर करने की tension. इसी कशमकश में रमिंदर चिंता से ग्रस्त ज़िंदगी जीने को मजबूर था. इस बार फिर उसने compartment के पेपर भरे थे. वो दिन रात इस compartment के पेपर को निकालने के लिए मेहनत कर रहा था. फिर वो दिन आया जब रमिंदर इस compartment के पेपर को देने एग्जामिनेशन हॉल में बैठा होता है और question paper को देख कर सवाल हल करने लगता है. किसी तरह वो पेपर देकर घर पहुँचता है. जैसे ही वो घर पहुँचता है सभी घरवाले रमिंदर से पेपर के बारे में पूछते हैं.रमिंदर पेपर कैसा हुआ आज तुम्हारा, इस बार पास तो हो जाओगे ना अगर इस बार पास नहीं हुए तो अगली बार तुम्हारा Golden chance है ऐसा रमिंदर के पिता ने कहा. Golden chance का सुन कर वो और टेंशन में चला जाता है. शायद उसे अब भी शक था की मैं अब भी पास नहीं हो पाऊंगा और एक दिन रमिंदर का शक सच्चाई में तब्दील हो गया वो 2nd chance में भी compartment क्लियर नहीं कर पाया. उसी रात रमिंदर के पिता उससे बैठ कर बात करने लगे आखिर तुम्हें क्या हो जाता है तुम अच्छे से पढ़ाई तो करते हो लेकिन compartment क्लियर नहीं कर पा रहे हो. रमिंदर अपने पिता से कहने लगा,” papa जी मैं exam hall में जब question paper को देख कर सवाल लिखना शुरू करता हूँ तो अगले ही पल एक blankness दिमाग में छा जाती है. मैं समझ नहीं पा रहा हूँ ऐसा क्यूँ हो रहा है. रमिंदर के पिता बोले चलो अब जो हुआ सो हुआ अब Golden chance में अच्छे से तैयारी करना अगर तुम इस में भी फेल हो गए तो दोबारा से Bsc 1st year में जाना पड़ेगा. ये सुन कर रमिंदर मन ही मन घबराहट महसूस करने लगा.

Ramindar Singh

आख़िरकार Golden chance का पेपर हुआ फिर कुछ दिनों बाद पेपर का result पता करवाने के लिए रमिंदर के पिता ने अपने दोस्त से कहा. रमिंदर के घर के फ़ोन की घंटी बजती है फ़ोन रमिंदर ही उठता है… फ़ोन पर वही अंकल होते हैं जिन्हें result पता करवाने के लिए कहा होता है. वो रमिंदर को कहते हैं बेटा तुम इस बार फ़िर फेल हो गए हो..जैसा ही रमिंदर ये सुनता है उसके हाथ से फ़ोन गिर जाता है और वो मायूस हो कर रोने लगता है..लेकिन अगले ही पल फिर उसी अंकल का फ़ोन आता है उसके पापा फ़ोन उठाते हैं. वो कहते हैं भाई माफ़ करना रमिंदर इस बार पास हो गया है वो गलती से उसके आगे का रोल नंबर देख लिया था. जैसा ही रमिंदर ये सुनता है उसमें ख़ुशी की लहर दौड़ जाती है. इस कहानी से हमें ये प्रेणना भी मिलती है हमें ज़िंदगी में किसी भी मौके पर हार से घबराना नहीं चाहिए और अपना कर्म करते रहना चाहिए कामयाबी ज़रूर मिलती है. आपको ये कहानी कैसी लगी like और comment करें. आपका #भाईजान

Raminder Singh

Like

Like Love Haha Wow Sad Angry

1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *