Sab ka aik Bhaijaan

बेज़ुबान जानवरों को तकलीफ में नहीं देख सकते हैं रमिंदर सिंह…

Sab Ka Aik Bhaijaan

Sab ka Aik Bhaijaan: हर शख्स को ज़िंदगी में किसी न किसी शौक का जोश और जूनून ज़रूर होना चाहिए.जिसे करने में उसे बेहद सुकून भी मिलता हो.सबका एक भाईजान में आज की इस कड़ी में रमिंदर सिंह की कहानी भी कुछ इस तरह के शौक को बयान करती है. जो जानवरों और परिंदों के प्यार से जुडी है.

Raminder Singh with his parrot mithu

रमिंदर सिंह चंबा हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं. यूँ तो वो MCA की पढ़ाई करके अपना कारोबार कर रहे हैं. लेकिन रमिंदर की दिल की गहराईयों में जानवरों से बेहद लगाव है. जिन्हें हम True animal lover कह सकते हैं. रमिंदर बताते हैं कि उन्हें इसकी प्रेणना घर के माहौल से ही मिली है. बच्चपन के दिनों में रमिंदर के पिता ने एक जर्मन शेफर्ड डॉग को पाला था. उस dog की सब घरवालों से ऐसी जमी के वो सब के दिलों में उतर गया.उसके बाद जब रमिंदर 2nd Class में थे तो उनके पिता एक Fish Aquarium घर ले आये. जो बच्चों के दिल में जानवरों के प्रति प्यार का बीज बो गई.

Raminder with his white rat

रमिंदर ने अब तक white rat, wood cutter Bird और बहुत से परिंदों और जानवरों को पालने के बाद parrot और dog को पाल रहे हैं. उनका ये शौक जानवरों को पालने तक सीमित नहीं है. अपना एक वाक्या साँझा करते हुए रमिंदर सिंह बताते हैं कि गर्मियों के दिनों की बात है जब वो दूकान से अपने घर जा रहे थे तो रास्ते में एक गाय प्यास के मारे तड़प रही थी उसकी तड़प को देख कर रमिंदर जल्दी घर से एक पानी की बाल्टी ले आया और उस गाय के आगे पीने को रख दी. फिर वो जब भी घर को लौटा करता तो वही गाय उनके घर के दरवाज़े उनको अक्सर मिला करती थी. तो वो उस गाय को कुछ ना कुछ खाने को ज़रूर देते थे. जिससे उन्हें काफी सुकून मिलता था. रमिंदर कहते हैं उन्हें जानवरों को तड़प में देख कर अजीब एहसास होता है और वो बेज़ुबनो के लिए कुछ ना कुछ करने को तैयार हो जाते हैं.

अक्सर वो गुमनाम रह कर आवारा पशुओं को लेकर कुछ ना कुछ भलाई का काम ज़रूर करते रहते हैं. रमिंदर बताते हैं वो बेज़ुबानों के लिए किसी वाह वाही के लिए काम नहीं करते हैं. बल्कि वो बेजुबानों को तकलीफ में नहीं देख सकते हैं. इसको लेकर रमिंदर सिंह कि प्रशासन और सरकार से मांग है कि सभी तरह के आवारा जानवरों को एक common शेल्टर प्रदान किया जाये. जिससे इन आवारा जानवरों की भी जिंदगियां बचाई जा सके. उनकी ये सोच उन्हें भाईजान बनाती है. भाईजान बोले तो लीडर. आपको लीडर बनने के लिए किसी रुतबे और ओधे की ज़रूरत नहीं ना ही अखबार और टीवी में फोटो आना लाज़मी है. लीडर हर कहीं लीडर होता है. दरासल लीडर सोच से बनता है. तो ये थे आज के हमारे sab ka Aik Bhaijaan. अगर आपको ये article अच्छा लगा हो तो Like का बटन press करें और comment करके अपनी राय ज़रूर दें. सदा मौज में रहें. आपका #MirzaBhaijaan

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